Sonu Rawat Sun May 06 16:21:43 UTC 2018
आँखें मुझे तलवे से मलने नहीं देते; अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते; खातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते; सच है कि हमीं दिल को संभलने नहीं दते; किसी नाज़ से कहते हैं झुंझला के शब-ए-वस्ल; तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।
2 Likes 0 Comments